राफेल डील पर सवाल उठा रही कांग्रेस अब अमित शाह के इस बयान के बाद हो जाएगी मौन

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नई दिल्ली। राफेल डील मामले को लेकर मोदी सरकार को घेरने में जुटी कांग्रेस को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दो टूक अंदाज में जवाब दिया है। उन्होंने ऐसा सटीक जवाब दिया है कि कांग्रेस के नेता पानी—पानी हो जाएंगे। सा​थ ही केंद्र की राजग सरकार के खिलाफ राफेल डील में भ्रष्टाचार के आरोप लगाने से भी बचने लग जाएंगे।

 

एबीपी न्यूज के एक कार्यक्रम में साक्षात्कार के दौरान शाह ने कह दिया कि राफेल डील दो देशों की सरकारों के बीच हुई थी। और सबसे अहम बात तो यह है कि इस डील में क्वात्रोची की तरह कोई दलाल नहीं था। जाहिर तौर पर अमित शाह का इशारा कांग्रेस की राजीव गांधी सरकार के दौरान हुए बोफोर्स घोटाले की तरफ था। इस घोटाले में दलाल क्वात्रोची की भूमिका सवालों के घेरे में रही थी और कांग्रेस से उसके संबंधों को लेकर पूरा मामला घोटाले के तौर पर सामने आया था।

 

ऐसे में अमित शाह का यह कहना कि राफेल डील में ऐसा कोई दलाल नहीं था बेहद अहम है। कांग्रेस को उन्होंने बडी ही चतुराई से कठघरे में खडा कर दिया। अमित शाह के बयान से एक और अहम बात सामने आती है कि राफेल डील से उन्होंने फोकस को बोफोर्स पर कर दिया।

गौरतलब है कि कांग्रेस के नेताओं ने राफेल डील को लेकर मोदी सरकार पर आरोपों की बौछार कर रखी है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि यूपीए के वक्त के डील में बदलाव कर महंगे राफेल फाइटर विमान मोदी सरकार ने खरीदने का समझौता किया है। रक्षामंत्री सीतारमण पहले ही इस आरोप का जोरदार खंडन कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि राफेल डील पहले की यूपीए सरकार से एनडीए सरकार ने बेहतर किया है।

 

 

दरअसल गुजरात चुनाव के दौरान कांग्रेस राफेल डील के जरिए भाजपा को घेरना चाहती थी। कांग्रेस यह संदेश देना चाह रही थी कि भ्रष्टाचार का दाग मोदी सरकार के दामन पर भी लग गया है। ऐसे में भाजपा प्रमुख अमित शाह का बयान काफी अहम माना जा रहा है। उन्होंने बिना कुछ ज्यादा कहे संदेश दे दिया है कि बोफोर्स को लेकर कठघरे में खडी कांग्रेस के पास तो इस पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार ही नहीं है। बोफोर्स में दलाल की मौजूदगी और उसकी भूमिका थी जबकि राफेल डील में ऐसा कुछ नहीं है। यह तो दो सरकारों के बीच किया गया करार है।




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